मीनाक्षी से मिनीमाता बनने का सफर, पहली महिला सांसद जिसने सतनामी समाज को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई, पढ़े पूरी कहानी..

रायपुर- छत्तीसगढ़ की पहली महिला सांसद मिनीमाता का 11 अगस्त को पुण्यतिथि मनाया जायेगा। मिनीमाता का जन्म 13 मार्च 1913 को असम के दौलगांव में हुआ। उनका बचपन का नाम मीनाक्षी था जो बाद में मिनीमाता के नाम से जाने लगी। मीनाक्षी बचपन में पढ़ाई-लिखाई में तेज थीं, उन्हें असमिया, अंग्रेजी, बांग्ला, हिन्दी और छत्तीसगढ़ी भाषा का अच्छा ज्ञान था।

मिनीमाता का विवाह सतनामी समाज आराध्य संत गुरुघासीदास के चौथे वंशज गुरु अगमदास से हुआ। विवाह होकर छत्तीसगढ़ आई। गुरु अगमदास सच्चे देशभक्त थे, उनके आंदोलनों और देशभक्ति से प्रेरित होकर मीनाक्षी भी देशसेवा में शामिल हो गई और मिनीमाता ने उनकी प्रेरणा से स्वाधीनता के आंदोलन, समाजसुधार और मानव उत्थान कार्यों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

वर्ष 1951 से 1971 तक लोकसभा की सांसद रही। इस मिनिमाता ने अपनी जिम्मेदारियों को बखूबी निभाया। सरल एवं सहज व्यक्तित्व की धनी इस महिला ने अपना पूरा जीवन मानव सेवा के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने शासन-प्रशासन के साथ समन्वय बनाकर मानव कल्याण, नारी उत्थान, किसान, मजदूर, छूआ-छूत कानून, बाल विवाह, दहेज प्रथा, निःशक्त व अनाथों के लिए आश्रम, महिला शिक्षा और छत्तीसगढ़ के लिए आंदोलन जैसे जनहित के अनेक कार्यों में महत्वपूर्ण योगदान दिया। मिनीमाता ने दलितों के नागरिक अधिकारों की रक्षा के लिए अस्पृश्यता अधिनियम को संसद में पारित कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

हसदेव का नाम मिनीमाता के नाम पर –
मिनीमाता ने सतनामी समाज को अखिल भारतीय स्तर पर प्रतिष्ठा दिलवाई। मिनीमाता का देश के शीर्षस्थ राजनायिकों जिनमें प्रमुखतः प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद, डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन, पंडि़त जवाहर लाल नेहरू, श्रीमती इंदिरा गांधी, पंडि़त रविशंकर शुक्ल सहित अनेक राजनायिकों से आत्मीय संबंध रहे। उनके इस पुनीत कार्यो के लिए सरकार ने हसदेव बांगो बांध को मिनीमाता के नाम पर किया गया । बांगो बांध से किसानों को हजारों एकड़ में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध हुई। उनकी उपलब्धियों के लिए कोरबा लोकसभा क्षेत्र शासकीय कन्या महाविद्यालय के परिसर में मिनीमाता की आदमकद प्रतिमा स्थापित की गई है। छत्तीसगढ़ में धूमधाम से उत्साह के जयंती मनाई जाती है।

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