इसरो के जनक साराभाई को गूगल ने दीं श्रद्धांजलि…सबसे तेज और युवा वैज्ञानिक की कहानी जिसने कलाम को मिसाइल मेन बनाया।

नई दिल्ली– गूगल ने भारतीय वैज्ञानिक विक्रम सारा भाई का डूडल बनाकर श्रद्धांजलि दी। विक्रम साराभाई भारत के प्रसिद्ध वैज्ञानिक थे, उन्होंने ने ही इसरो का अविष्कार किया था। आज ौंकि 100वी जयंती है, विक्रम सारा भाई का जन्म 12 अगस्त को गुजरात के अहमदाबाद में हुआ था। साराभाई ने महज 28 साल की उम्र में ही अहमदाबाद में फिजिकल लेबोरटरी की स्थापना किया था।

डॉ. विक्रम साराभाई ने माता-पिता की प्रेरणा से बचपन में ही यह निश्चय कर लिया कि उन्हें जीवन विज्ञान के माध्यम से देश और मानवता की सेवा में लगाना है। स्नातक की शिक्षा के लिए वे कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय चले गए और 1939 में ‘नेशनल साइन्स ऑफ ट्रिपोस’ की उपाधि ली। द्वितीय विश्व युद्ध छिड़ने पर वे भारत लौट आए और बंगलुरु में प्रख्यात वैज्ञानिक डॉ. चंद्रशेखर वेंकटरामन के निर्देशन में प्रकाश संबंधी शोध किया। इसकी चर्चा सब ओर होने पर कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय ने उन्हें डीएससी की उपाधि से सम्मानित किया। अब उनके शोध पत्र विश्वविख्यात शोध पत्रिकाओं में छपने लगे।

कलाम को मिसाइल में बनाया-
पूरी दुनिया पूर्व राष्ट्रपति डॉ एपीजे अब्दुल कलाम को मिलाइल मेन के नाम से जानती है, उन्हें ये तमगा डॉ विक्रम सारा भाई ने दी। डॉ. साराभाई ने न सिर्फ डॉ.अब्दुल कलाम का इंटरव्यू लिया, बल्कि उनके करियर के शुरुआती चरण में उनकी प्रतिभाओं को निखारने में अहम भूमिका निभाई। डॉ.कलाम ने खुद इस बात को स्वीकारा था कि ” वह तो उस फील्ड में नवागंतुक थे। डॉ.साराभाई ने ही उनमें खूब दिलचस्पी ली और उनकी प्रतिभा को निखारा। डॉ. कलाम ने कहा था

‘डॉ. विक्रम साराभाई ने मुझे इसलिए नहीं चुना था क्योंकि मैं काफी योग्य था बल्कि मैं काफी मेहनती था। उन्होंने मुझे आगे बढ़ने के लिए पूरी जिम्मेदारी दी। उन्होंने न सिर्फ उस समय मुझे चुना जब मैं योग्यता के मामले में काफी नीचे था, बल्कि आगे बढ़ने और सफल होने में भी पूरी मदद की। अगर मैं नाकाम होता तो वह मेरे साथ खड़े होते।’

मशहूर नृत्यांगना से हुआ विवाह-
साराभाई का विवाह प्रख्यात नृत्यांगना मृणालिनी देवी से हुआ। उनके घर के लोग गांधीजी के पक्के अनुयायी थे, उनके घर के लोग उनकी शादी में भी शामिल नहीं हो पाए थे, क्योंकि उस समय वे लोग गांधीजी के नेतृत्व में भारत छोड़ो आंदोलन में व्यस्त थे। उनकी बहन मृदुला साराभाई ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम में अहम भूमिका निभाई।

IIM और फिजिक्स रिसर्च लेबोरेट्री बनाने में की मदद-
डॉ. साराभाई भारत के ग्राम्य जीवन को विकसित देखना चाहते थे। ‘नेहरू विकास संस्थान’ के माध्यम से उन्होंने गुजरात की उन्नति में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। वह देश-विदेश की अनेक विज्ञान और शोध सम्बन्धी संस्थाओं के अध्यक्ष और सदस्य थे। अन्तरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त करने के बाद भी वे गुजरात विश्वविद्यालय में भौतिकी के शोध छात्रों को सदा सहयोग करते रहे।

उन्होंने अहमदाबाद में IIM और फिजिक्स रिसर्च लेबोरेट्री बनाने में मदद की। उन्हें भारत सरकार ने 1966 में पद्मभूषण और 1972 में पद्मविभूषण से नवाजा। 52 साल की उम्र में उनके निधन के बाद देश के पहले सेटेलाइट आर्यभट्ट को लॉन्च किया गया, लेकिन उसकी बुनियाद डॉ. साराभाई तैयार कर गए थे।

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